November 27, 2014

बेवफ़ा उसे न कहो


ये और बात है, के लगता आज बेपरवाह  है वो,
के हवा दी थी उसी ने, इन मुहब्बत के जज़्बों को।

आज उसके किये वादे की कीमत कुछ नहीं है तो,
दिलबर था वो मेरा, अब बुरा उसे न कहो।

के याद मुझे करके, रोता है तन्हाई में वो,
यकीन नहीं है ग़र, तो चलो फ़र्ज़ ही कर लो।

के अपनी किन्हीं मजबूरियों का क़ैदी है वो,
साथ छोड़ गया है मेरा, तो बेवफ़ा उसे न कहो।

बहुत मुश्किल है मिटाना दाग़, दिल हो या दमन हो,
न दाग़ बेवफाई का, दो उसके दमन को।

4 comments:

  1. Bahut gaharai hai is kavita me. Very nice poem. Kavi ka dard nazar aat ahai is kavita se.

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    1. शुक्रिया, Anusia...
      के दाग़ दमन पे नहीं, दिल पे लिया है मैंने।

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  2. Mai samajh sakti hu. But it was really nice.

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